नई दिल्ली:
पति-पत्नी के अटूट प्रेम, त्याग, निष्ठा और समर्पण का प्रतीक ‘करवा चौथ’ का पावन पर्व बीते कल देश भर में बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और अपने पति की दीर्घायु के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर ईश्वर से मंगल कामना की। सुबह की सरगी से लेकर रात के चंद्र दर्शन तक बाजारों और घरों में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के कई इलाकों में मौसम के बदले मिजाज और रिमझिम बारिश ने सुहागिनों के सब्र का कड़ा इम्तिहान लिया।
बादलों का पहरा और दिल्ली-NCR में लंबा इंतजार
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कल शाम अचानक मौसम बदल गया। आसमान में घने बादलों के छाने और हल्की बारिश की वजह से चांद के दीदार के लिए महिलाओं को लंबा इंतजार करना पड़ा। निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जब चांद नजर नहीं आया, तो घरों की छतों और बालकनियों पर सुहागिनें बेचैनी से बादलों के छंटने की राह देखती नजर आईं।
जहां आमतौर पर रात 8:15 से 8:30 बजे के बीच पूजा संपन्न हो जाती थी, वहीं बादलों की लुका-छिपी के चलते कई इलाकों में रात 9:30 से 10 बजे के बाद ही चांद की हल्की झलक मिल सकी। इस दौरान छतों पर परिवार के सदस्य बादलों के बीच चांद की रोशनी तलाशने में जुटे रहे।
आस्था के साथ तकनीक का संगम: ऑनलाइन चांद देखकर खोला व्रत
मौसम की बेरुखी के बीच आधुनिक तकनीक सुहागिनों के लिए बड़ा सहारा बनी। दिल्ली-एनसीआर में जब चांद बादलों के पीछे छुपा रहा, तब बड़ी संख्या में महिलाओं ने डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर अपना निर्जला उपवास पूरा किया।
वीडियो कॉल का सहारा: कई महिलाओं ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब या मध्य प्रदेश में रह रहे अपने रिश्तेदारों को वीडियो कॉल किया, जहां आसमान साफ था और चांद पहले ही निकल चुका था। स्क्रीन पर लाइव दिख रहे चांद के दर्शन कर महिलाओं ने अपनी पूजा संपन्न की।
सोशल मीडिया और लाइव स्ट्रीमिंग: यूट्यूब और न्यूज चैनलों पर विभिन्न शहरों से हो रहे चंद्र दर्शन के लाइव प्रसारण को देखकर भी कई व्रतियों ने अर्घ्य दिया और अपना उपवास तोड़ा।
दूर बैठे पतियों के साथ वर्चुअल पूजा: देश और विदेश में नौकरी के चलते दूर रह रहे पतियों के साथ भी महिलाओं ने व्हाट्सएप, फेसटाइम और जूम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए पूजा की परंपरा पूरी की।
इस प्रकार परंपरा और आधुनिक तकनीक के इस सुंदर तालमेल ने यह साबित कर दिया कि आस्था के आगे भौगोलिक दूरी या मौसम की रुकावटें कोई मायने नहीं रखतीं।
छलनी से चांद और पति को देखने की आध्यात्मिक परंपरा
करवा चौथ की सबसे भावुक और सुंदर परंपरा छलनी से जुड़ी है। महिलाएं जल से भरा लोटा, दीपक और पूजन सामग्री लेकर छलनी की ओट से पहले चंद्रमा को देखती हैं, अर्घ्य देती हैं और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा निहारती हैं। इसके बाद पति अपनी पत्नी को जल पिलाकर और मिष्ठान खिलाकर उनका निर्जला व्रत खुलवाते हैं।
इस प्रथा के पीछे गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक संदेश छिपा है:
चंद्रमा और मन का संबंध: ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक और शीतलता, सौंदर्य तथा अमरता का प्रतीक माना गया है। छलनी के माध्यम से जब चंद्रमा की शीतल किरणें छनकर आंखों तक पहुंचती हैं, तो वे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।
छलनी का प्रतीकात्मक अर्थ: छलनी का मुख्य कार्य अशुद्धियों को छानकर केवल शुद्ध तत्व को अपनाना होता है। आध्यात्मिक रूप से इसका अर्थ यह है कि वैवाहिक जीवन में आने वाली हर बुराई, गलतफहमी या नकारात्मकता बाहर ही छन जाए और केवल प्रेम, विश्वास व पवित्रता ही रिश्ते में भीतर प्रवेश करे।
पति में ईश्वर का रूप देखना: हिंदू दर्शन में पति को परमेश्वर का रूप मानकर सम्मान देने की परंपरा रही है। चंद्रमा की पावन किरणों के बाद जब पत्नी अपने जीवनसाथी को देखती है, तो वह चंद्रमा की अमरता और दीर्घायु की प्रार्थना सीधे अपने पति के लिए समर्पित करती है।
दांपत्य प्रेम की नई मिसाल
करवा चौथ का पर्व अब केवल रूढ़िवादिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बराबरी और आपसी सम्मान का उत्सव बन चुका है। बीते कल कई शहरों में पतियों ने भी अपनी पत्नियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। दिनभर की भूख-प्यास के बाद रात को जब छलनी से चांद और पति का दीदार हुआ, तो हर चेहरे पर सुकून और असीम प्रेम की चमक साफ दिखाई दी।
सोलह श्रृंगार, हाथों में रची मेहंदी और दिल में अखंड सुहाग की कामना के साथ संपन्न हुआ यह पर्व एक बार फिर भारतीय संस्कृति के सबसे खूबसूरत रिश्ते—दांपत्य प्रेम—की अटूट डोर को और अधिक मजबूत कर गया।
