एक तरफ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था यानी हमारा भारत है तो दूसरी तरफ खाड़ी देशों का चमकता सितारा तकनीक और व्यापार का ग्लोबल हब यानी कि यूनाइटेड अरब अमीरात यानी कि यूएई। जब यह दो शक्तियां हाथ मिलाती है तो इतिहास नहीं रचा जाता है बल्कि भविष्य लिखा जाता है। ऐसे में आज भारत और यूएई की ताकत का आलम यह है कि दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश इस दोस्ती की मिसाल दे रहे हैं और इस दोस्ती ने अब एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है जो अकल्पनीय है। 100 बिलियन डॉलर का द्विपक्षी व्यापार। यह केवल पैसा नहीं है। यह दो संस्कृतियों का भरोसा है। यह भारत की एक्ट, वेस्ट पॉलिसी और यूएई के विज़न 2031 का सबसे बड़ा प्रमाण है। दरअसल इस महासफलता की कहानी शुरू होती है साल 2022 में। जब पूरी दुनिया महामारी के असर से जूझ रही थी तब भारत और यूएई ने सीईपीए पर हस्ताक्षर कर दिए। दोनों ने साथ में हस्ताक्षर किए और यह यूएई द्वारा किसी भी देश के साथ किया गया पहला द्विपक्षी व्यापार समझौता था।
साल 2022 याद रखिए यूएई ने भारत को चुना। यह भारत की वैश्विक साख का प्रतीक है। प्रमाण है। उस समय व्यापार लगभग 60 बिलियन डॉलर पर था। लेकिन आज साल 2026 में हम बैठे हैं और साल 2026 के वित्तीय वर्ष के अंत तक यह आंकड़ा 100 बिलियन को पार कर जाएगा। अब इसका असर क्या हुआ? चलिए पॉइंट में हम समझते हैं। पहला असर है भारत के 80% सामानों पर सीमा शुल्क यानी ड्यूटी खत्म कर दी गई। दूसरा है भारतीय ज्वेलरी कपड़े और इंजीनियरिंग सामानों के लिए यूएई का बाजार पूरी तरह से खुल गया। अब तीसरा पॉइंट और भी इंटरेस्टिंग है। अगले 10 सालों में लगभग सभी टेरिफ हटने वाले हैं। यह आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। और चौथा है अब लक्ष्य है साल 2032 तक 200 बिलियन डॉलर का व्यापार। यानी कि भारत और यूएई मिलकर एक ऐसी ट्रेड इकॉनमी बना रहे हैं जो कई यूरोपीय देशों की कुल जीडीपी से भी बड़ी होगी। अब दोस्ती सिर्फ व्यापार में नहीं दिखती है। निवेश में भी दिखती है। यूएई आज भारत में निवेश करने वाला सातवां सबसे बड़ा देश बन चुका है। अप्रैल 2000 से अब तक यानी साल 2026 तक यूएई ने भारत में 25.59 बिलियन का सीधा निवेश जिसे हम एफडीआई कहते हैं वो किया है। लेकिन असली तेजी पिछले 4 से 5 सालों में आई है।
इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी आईएc ने अंबानी ग्रुप के साथ मिलकर 11.5 बिलियन का एलुमिनियम प्रोजेक्ट शुरू किया है और यह भारत की औद्योगिक ताकत को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। Reliance और मुबादला। जी हां, अबू धाबी की मुबादला कंपनी ने Reliance Industries के साथ डिजिटल प्लेटफार्म में भारी निवेश किया है। डीपी वर्ल्ड कंपनी भारत के बंदरगाहों यानी कि पोर्ट्स और लॉजिस्टिक में पहले ही $3 बिलियन लगा चुकी थी और अब $5 बिलियन का और निवेश करने का संकल्प लिया है।
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