इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को अरब राजनीतिक नेताओं और विपक्षी सांसदों के बयानों का एक संकलन साझा किया। उन्होंने अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने के अपने विरोध को दोहराते हुए कहा, “उनके साथ सरकार बनाना वर्जित है। एक्स पर एक पोस्ट में नेतन्याहू ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें कई अरब राजनेताओं और सांसदों – जिनमें अहमद तिबी, ईमान खतीब-यासीन, मंसूर अब्बास, सामी अबू शेहादेह, ओफेर कासिफ, यूसुफ जबरीन और अयमान ओदेह शामिल हैं के भाषणों और बयानों के अंश दिखाए गए हैं। वीडियो में अरब नेताओं को फिलिस्तीनी मुद्दे का समर्थन करते हुए सुना जा सकता है, जिसे दक्षिणपंथी यहूदी गुट देश-विरोधी मानते हैं।
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चुनाव अधिकारियों की ओर से जारी अंतिम नतीजों के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन को 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में 53 सीट मिली हैं। यह पिछली संसद में उसके पास अधिकतम 68 सीट के मुकाबले काफी कम है। वहीं, मुख्य विपक्षी गठबंधन को 48 सीट और अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को कुल 19 सीट मिली हैं। मतगणना पूरी हो चुकी है, लेकिन नतीजों को अभी आधिकारिक मंजूरी मिलनी बाकी है। इन्हें अगले बुधवार को देश के राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए है। मंगलवार को हुए मतदान के बाद ‘एग्जिट पोल’ में नेतन्याहू को झटका लगने के संकेत मिलने के बाद से ही उनकी पार्टी लिकुड अरब नेतृत्व वाली पार्टियों पर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगा रही है। हालांकि, इजराइल की चुनाव समिति के प्रमुख और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नोआम सोहल्बर्ग के उस बयान के बाद इन आरोपों को और हवा मिली, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके सामने विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े गंभीर संदेह रखे गए हैं। सोहल्बर्ग ने इजराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को लिखे पत्र में कहा कि वह इन दावों की पुष्टि नहीं कर सकते।
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हालांकि, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने एजेंसी से मामले की जांच करने का अनुरोध किया। इसके बाद नेतन्याहू की पार्टी ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा, इजराइल में चुनाव चुरा लिया गया है। पार्टी ने बिना कोई सबूत पेश किए दावा किया कि कथित विदेशी हस्तक्षेप का मकसद संसद पर विदेशी कब्जा करवाना, इजराइल का इस्लामीकरण करना और दक्षिणपंथी सरकार को सत्ता से हटाना है। इजराइली मीडिया की खबरों के मुताबिक, नेतन्याहू की पार्टी के कुछ सदस्य चुनाव में पिछड़ने में कतर का हाथ बता रहे हैं। इजराइल में कुछ लोग कतर को गाजा के चरमपंथी संगठन हमास का समर्थक मानते हैं। वहीं कतर ने इन आरोपों को तुरंत खारिज करते हुए इन्हें हास्यास्पद और खतरनाक बताया।

