जब नैनीताल उत्तराखंड घूमने की बात आती है, तो नीम करोली बाबा का नाम सबसे पहले आता है। उत्तराखंड का प्रसिद्ध कैंची धाम याद आता है। लेकिन बाबा नीम करोली से संबंधित आध्यात्मिक विरासत सिर्फ कैंची धाम तक सीमित नहीं मानी जाती है।
कुमाऊं की पहाड़ियां में कुछ ऐसे स्थान भी जिनका संबंध बाबा की साधना, तप और आध्यतात्मिक पंरपरा से संबंधित है। इन्हीं में से एक है भूमियाधार और बाबा संबंधित समाधि मंदिर का विशेष महत्व बताया जाता है।
कुछ समय से कैंची धाम की लोकप्रियता पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है और यहां श्रद्धालुओं की भीड़ भी काफी बढ़ी है। इन धार्मिक स्थलों की यात्रा भी दिल्ली से आसानी से तय की जाती है। 2 से 3 दिन की आध्यात्मिक यात्रा के रुप में प्लान किया जा सकता है।
भूमियाधार- बाबा से जुड़ा शांत आध्यात्मिक पड़ाव
बता दें कि, कैंची धाम से अलग भूमियाधार का माहौल अपेक्षाकृत शांत आध्यात्मिक अनुभव दे सकता है। यहां पर स्थित श्री हनुमान मंदिर भूमियाधार स्थानीय धार्मिक स्थल के रुप में जाना जाता है। नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक परंपरा से संबंधित यात्रा मार्गों में भूमियाधार को भी शामिल किया जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर में दर्शन और कुछ समय शांत वातावरण में ध्यान-प्रार्थना के लिए रुक सकते हैं।
भूमियाधार आश्रम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली और हल्द्वानी मार्ग पर कैंची धाम के पास है। यहां पर संत नीम करौली बाबा की प्रथम तपोस्थली और एक मुख्य हनुमान मंदिर है। यहां स्थित हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना नीम करौली बाबा ने की थी।
यदि आपके उद्देश्य सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि बाबा से संबंधित स्थलों को समझना है, तो भूमियाधार को यात्रा में जगह देना एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।
दिल्ली से कैसे बनाएं ट्रिप प्लान?
पहला दिन- दिल्ली से कुमाऊं
जल्दी सुबह दिल्ली से कार लेकर निकलें। सामान्य रूट दिल्ली से गाजियाबाद, हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर होते हुए हल्द्वानी से काठगोदाम और अंत में भवाली की तरफ जा सकते हैं। इसके बाद अपने ठहरने के स्थान तक पहुंच सकते हैं। पहले दिन ज्यादा जगह कवर करने से बेहतर है आराम करें, क्योंकि पहाड़ी रास्तों पर यात्रा में समय लग सकता है।
दूसरा दिन- भूमियाधार और कैंची धाम
दूसरे दिन सुबह भूमियाधार जाकर मंदिर के दर्शन करें और कुछ समय शांत वातावरण में बिताएं। जिसके बाद कैंची धाम की तरफ जाएं। कैंची धाम में भीड़ की स्थिति पहले से जांच लेना समझदारी होगी। हाल ही में रिपोर्ट में भारी भीड़ और ट्रैफिक की समस्या भी देखने को मिली है।
तीसरा दिन- समाधि स्थल और वापसी
ट्रिप के तीसरे दिन बाबा से संबंधित समाधि मंदिर/स्थल के दर्शन करें। फिर दिल्ली वापसी शुरु करें।
ट्रेन से सफर करने वाले
जो लोग ट्रेन से जाना चाहते हैं, वो दिल्ली से काठगोदाम तक ट्रेन लेना एक सुविधाजनक ऑप्शन हो सकता है। काठगोदाम से आगे टैक्सी या स्थानीय वाहन लेकर भवाली-कैंची धाम क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है। कैंची धाम काठगोदाम से करीब 40 किलोमीटर के पास है।
इस यात्रा में किन बातों का रखें ध्यान?
– पहाड़ी यात्रा के लिए सुबह जल्दी निकलें।
– वीकेंड और लंबे अवकाश में भीड़ अधिक हो सकती है।
– मंदिरों के स्थानीय नियमों और समय का पालन करें।
– पहाड़ी रास्तों पर रात में ड्राइविंग से बचना जरुरी है।
– पहाड़ों पर जाएं, तो एक बार मौसम की स्थिति जरुर चेक करें।

