फ्रांस में बढ़ती महंगाई के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। पेरिस और देश के चार उत्तरी शहरों में सोमवार से रात के समय कुछ इलाकों में आने-जाने पर रोक लगा दी गई है। यह फैसला तब लिया गया, जब प्रदर्शनकारियों ने पेरिस के मशहूर लूव्र म्यूजियम के प्रवेश द्वार को भी रोक दिया।
प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार हालात को सामान्य करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर देश में आपातकाल लगाया जा सकता है। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहा कि हिंसा के दौरान पुलिस के लिए हालात संभालना मुश्किल हो गया था।
चार शहरों में रात का कर्फ्यू
सरकार के अनुसार, लिली समेत चार उत्तरी शहरों में सोमवार और मंगलवार रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक कुछ इलाकों में कर्फ्यू रहेगा। इसका मकसद दुकानों और कारोबार को नुकसान से बचाना है।
पेरिस में भी सोमवार रात 9 बजे से कुछ इलाकों में विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है। प्रदर्शन के आयोजकों ने अगले शनिवार को फिर से विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
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आधे मिलियन लोग सड़कों पर उतरे
शनिवार को पूरे फ्रांस में करीब 5 लाख लोगों ने बढ़ती महंगाई और रहने के बढ़ते खर्च के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह विरोध पिछले चार हफ्तों से चल रहा था। शुरुआत में छात्रों ने स्कूलों में बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था।
हालांकि, बाद में कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए। नकाब पहने लोगों ने पुलिस पर हमला किया, सरकारी इमारतों में घुसकर तोड़फोड़ की और कई जगह आग लगा दी। दुकानों में लूटपाट हुई और कारों, साइकिलों और स्कूटरों में भी आग लगाई गई।
लूटे गए सामान की ऑनलाइन बिक्री पर रोक
हिंसा और लूटपाट के बाद फ्रांस की डिजिटल मंत्री ऐन ले हेनान्फ ने ऑनलाइन सामान बेचने वाली वेबसाइटों से चोरी का सामान बेचने वाले विज्ञापन हटाने को कहा है। इस मामले में Vinted और eBay जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया है। अमेजन, लेबोनकॉइन, मेटा और टिकटॉक के प्रतिनिधियों को भी बैठक के लिए बुलाया गया है।
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2,500 से ज्यादा लोग गिरफ्तार
हिंसा के दौरान 2,500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। करीब 1,000 पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों के जवान घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों में भी कई लोग घायल हुए। एक प्रदर्शनकारी का हाथ पुलिस की भीड़ को रोकने वाली ग्रेनेड की चपेट में आने से उड़ गया।
शनिवार को करीब 60,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद कई जगहों पर हालात बिगड़ गए। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी सरकार की कार्रवाई में हुई कमियों को माना है।
3,000 से ज्यादा दुकानें प्रभावित
फ्रांस के छोटे कारोबारियों के मंत्री सर्ज पापिन के मुताबिक, देशभर में कम से कम 3,000 दुकानें प्रभावित हुई हैं। हिंसा और तोड़फोड़ से सैकड़ों मिलियन यूरो का नुकसान होने का अनुमान है।

