अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस पर प्रतिबंध और दूसरे देशों से आने वाले सामान पर शुल्क लगाने के असर को समझने के लिए 60 दिन का समय चाहते हैं। इस दौरान अमेरिका और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया जाएगा।
रुबियो ने शनिवार को उज्बेकिस्तान और भारत के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भारत के लिए एक दिन में रूसी ऊर्जा से दूरी बनाना मुश्किल है।
उन्होंने कहा, “समस्या यह है कि ये प्रतिबंध सिर्फ रूस पर नहीं हैं। इनमें भारत जैसे कई देशों पर शुल्क भी शामिल हैं। इसलिए मुझे लगता है कि राष्ट्रपति 60 दिनों की इस अवधि में यह समझना चाहते हैं कि प्रतिबंध और शुल्क लगाने का दुनिया की अर्थव्यवस्था और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा।”
ट्रंप ने प्रतिबंध और शुल्क से मिली छूट को मंजूरी दी
ट्रंप ने शुक्रवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ के तहत प्रतिबंधों और शुल्क से छूट दी थी। उन्होंने इसके लिए राष्ट्रीय हित का हवाला दिया। यह कानून रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम के नाम पर है। वह यूक्रेन के मजबूत समर्थक थे और 11 जुलाई को उनकी मौत हो गई थी। इस कानून के तहत ट्रंप को रूस पर बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाने और रूस से सबसे ज्यादा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिला था। इनमें भारत और चीन भी शामिल हैं।
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दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति पर भी दबाव
रुबियो ने कहा कि कानून में प्रतिबंधों और शुल्क से छूट का प्रावधान इसलिए रखा गया था, ताकि बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इन कदमों के असर का अध्ययन करने के लिए कुछ समय मिल सके। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर कई घटनाओं का असर पड़ रहा है। इनमें अमेरिका-ईरान युद्ध, हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर हमले और रूस-यूक्रेन संघर्ष शामिल हैं।
रुबियो ने कहा, “इन सभी घटनाओं का वैश्विक कीमतों पर भी असर पड़ रहा है। इसलिए आपको इन सभी चीजों को ध्यान में रखना होगा और उनके असर की तुलना करनी होगी।”
भारत के लिए रूसी ऊर्जा से तुरंत दूरी बनाना मुश्किल
भारत का जिक्र करते हुए रुबियो ने कहा कि भारत ने अपनी ऊर्जा खरीद के स्रोतों में पहले ही बदलाव किया है, लेकिन इसके बावजूद वह अभी भी रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदता है। उन्होंने कहा, “भारत ने स्वेच्छा से अपनी ऊर्जा खरीद के स्रोतों में बदलाव किया है, लेकिन अभी भी उसे रूस से काफी मात्रा में ऊर्जा मिल रही है, क्योंकि एक दिन से दूसरे दिन में पूरी तरह बदलाव करना मुश्किल है।”
रुबियो ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार भी बताया। उन्होंने कहा कि इसलिए राष्ट्रपति को इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने और सही रास्ता तय करने के लिए समय चाहिए।
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रूस से डीजल खरीदने का भी ऐलान कर चुके हैं ट्रंप
ट्रंप की ओर से प्रतिबंधों से छूट देने का फैसला ऐसे समय आया है जब उन्होंने कुछ दिन पहले रूस से डीजल आयात करने की घोषणा की थी। इसका मकसद नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका में ईंधन की कीमतों को कम करना बताया गया था।

